देहरादून। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया अब राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गई है। निर्वाचन आयोग की ओर से राज्यभर में करीब 19.04 लाख मतदाताओं को नोटिस जारी किए जाने के बाद कांग्रेस ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की आशंका जताते हुए गंभीर सवाल उठाए हैं। वहीं भाजपा ने इसे पूरी तरह नियमित और पारदर्शी प्रक्रिया बताते हुए विपक्ष के आरोपों को निराधार बताया है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार, SIR के पहले चरण में एएसडीडी (Absent, Shifted, Death, Duplicate) श्रेणी में पाए गए 8,26,977 मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा चुके हैं। इसके बाद जारी अनंतिम मतदाता सूची में राज्य में कुल 71,33,785 मतदाता दर्ज किए गए हैं।
दूसरे चरण में मतदाता विवरण में विसंगतियां मिलने पर 19,04,380 मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं। साथ ही जिन मतदाताओं की पूर्व सत्यापन प्रक्रिया के दौरान मैपिंग नहीं हो सकी थी, उन्हें भी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए नोटिस भेजे गए हैं। निर्वाचन विभाग के अनुसार अब तक करीब 19 लाख नोटिस संबंधित मतदाताओं तक पहुंचाए जा चुके हैं।
निर्वाचन आयोग को अब तक फॉर्म-6 के लगभग 93 हजार, फॉर्म-7 के 1.39 लाख तथा फॉर्म-8 के 40 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। फॉर्म-7 के माध्यम से मतदाता सूची से नाम हटाने के आवेदनों को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने स्पष्ट किया कि दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी तरह नियमानुसार संचालित की जा रही है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक मतदाता अधिकतम पांच मामलों में दावा या आपत्ति दर्ज करा सकता है तथा अधिक संख्या में आवेदन आने पर ईआरओ और एईआरओ स्तर पर विस्तृत जांच और सत्यापन किया जाएगा। उन्होंने सभी जिलों को निर्देश दिए हैं कि सामान्य विसंगतियों का समाधान बीएलओ स्तर पर ही किया जाए, ताकि नागरिकों को अनावश्यक परेशानी न हो।
वहीं कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि फॉर्म-7 के माध्यम से चुनिंदा मतदाताओं, विशेषकर कांग्रेस समर्थकों, के नाम हटाने का प्रयास किया जा रहा है। कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री (संगठन) राजेंद्र सिंह भंडारी ने कहा कि यदि यह प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं रही तो लोकतांत्रिक अधिकार प्रभावित होंगे। कांग्रेस विधायक भुवन चंद्र कापड़ी ने भी खटीमा विधानसभा क्षेत्र में बड़ी संख्या में फॉर्म-7 दाखिल किए जाने की शिकायत करते हुए जांच की मांग की है।
दूसरी ओर भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता मथुरा दत्त जोशी ने कहा कि नोटिस केवल दस्तावेजों के सत्यापन के लिए भेजे गए हैं और पात्र मतदाताओं का नाम नहीं हटाया जाएगा। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता कुंदन परिहार ने कांग्रेस पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और नियमबद्ध है।
गौरतलब है कि SIR अभियान के दौरान कई प्रमुख व्यक्तियों को भी नोटिस जारी हुए हैं, जिनमें कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत और नैनीताल विधायक सरिता आर्या भी शामिल हैं। ऐसे में राज्य में मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक सरगर्मी लगातार बढ़ती जा रही है।



